जिह्वां पर हो नाम तुम्हारा प्रभुवर ऐसी भक्ति दो सम भावों से कष्ट सहुं बस मुझमें ऐसी शक्ति दो

जिह्वां पर हो नाम तुम्हारा प्रभुवर ऐसी भक्ति दो

जिह्वां पर  हो नाम तुम्हारा प्रभुवर ऐसी भक्ति दो

सम भावों से कष्ट सहुं बस  मुझमें ऐसी शक्ति दो

किन जन्मों में कर्म किए थे आज उदय में आएं हैं

कष्टों का कुछ पार नहीं है मुझपर वो मंडराएं है|

डिगे न मन मेरा समता से चरणों में अनुरक्ति दो

सम भावों से कष्ट सहुं बस  मुझमें ऐसी शक्ति दो

कायक दर्द भले बढ़ जावे किन्तु मुझमें क्षोभ ना हो

रोम रोम हो पीड़ित मेरा किंचित मन मे क्षोभ ना हो

दीन भाव नहीं आवे  मन में ऐसी शुभ अभिव्यक्ति दो

सम भावों से कष्ट सहुं बस  मुझमें ऐसी शक्ति दो

आर्त ध्यान नहीं आवे मन में दुःख दर्दों को  पी जाऊं

ध्यान लगा लुं प्रभु चरणों में हंस हंस कर मैं जी जाऊं

रोने से ना  कष्ट मिटे यह पावन चिंतन शक्ति दो

सम भावों से कष्ट सहुं बस  मुझमें ऐसी शक्ति दो

महावेदना भले सतावे ध्यान तुम्हारा ना छोडूं

जीवन के अन्तिम सांसों तक अपनी समता ना छोडूं

कभी ना मांगू प्रभुवर तुमसे कष्टो से मुझे मुक्ति दो

सम भावों से कष्ट सहुं बस  मुझमें ऐसी शक्ति दो

भले ना तन पे साथ जरा पर मन  साधन  अनुरक्त रहें

जीवन की हर सांस तुम्हारे चरणों की  ही भक्त रहें

रहें समाधि अविचल मेरी शांति कि अभिव्यक्ति दो

सम भावों से कष्ट सहुं बस  मुझमें ऐसी शक्ति दो

सम भावों से कष्ट सहुं बस

मुझमें ऐसी शक्ति दो

मुझमें ऐसी शक्ति दो

मुझमें ऐसी शक्ति दो

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